Wednesday , September 23 2020

जीवन की किसी लड़ाई में नहीं पड़ेंगे कमजोर, तो इन बातों का रखे ध्यान

आपकी मानसिक मांसपेशियां मजबूत होने पर ही आप जीवन की कई बड़ी चुनौतियों और परेशानियों से निपट सकते हैं।ऐसे में शारीरिक मांसपेशियों को मजबूत बनाने की तरह ही आपको अपनी मानसिक मांसपेशियों की ताकत के लिए वर्कआउट करने की जरुरत पड़ती है।
अपने नकारात्मक विचारों को बदलें:
आपके मन में अगर नकारात्मकता विचार आते हैं, जैसे, यह चीज तो कभी हो ही नहीं सकती, तो ऐसे विचारों को आप ‘अगर मैं मेहनत करूं, तो इसकी सफलता के अवसर बढ़ सकते हैं’ जैसी सकारात्मक बातों से बदल सकते हैं। यह सच है कि जीवन में घटने वाले बुरे अनुभवों से कहीं न कहीं हम नकारात्मक विचारों के शिकार बन जाते हैं लेकिन ऐसे दिनों को हम अपने सकारात्मक विचारों और अच्छे की उम्मीद के विचारों के साथ काट सकते हैं।
लक्ष्य बनाएं:
जीवन में बड़ा लक्ष्य बनाना या बड़े सपने देखना बहुत आसान है।कभी-कभी इन तक का पहुंचने का सफर हमें निराशाओं से भी भर देता है।ऐसे में बड़े लक्ष्य को निर्धारित करने से पहले हमें छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करें, ऐसे में जब आप छोटे-छोटे लक्ष्य प्राप्त करें, तो आप प्रेरणा से भर जाएंगे।
खुद को परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालें:
आपको रोजाना खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनने का प्रलोभन नहीं देना है बल्कि समय के हिसाब से आपको खुद में बदलाव करते रहना है।अपने जीवन को बिल्कुल भी जटिल न बनने दें।जैसे, अगर अगले दिन आपको वॉक पर जाना है, तो अपने बिस्तर के पास जूते रख दें, हेल्दी रहने का लक्ष्य है तो अपने घर से जंकफूड हटा दें। छोटी-छोटी चीजें या प्रयास आपको मानसिक मजबूती देती हैं।
बड़े लक्ष्य को पाने के लिए थोड़ी असुविधा को सहन करें:
आपको किसी काम को करने में जब भी कोई असुविधा हो, तो यह सोचकर खुद को प्रेरित करें कि इससे आपको बड़ी सफलता हासिल होगी।इससे आपको आत्मविश्वास महसूस होगा।
अपनी भावनाओं को तर्कों के साथ संतुलित रखें:
अगर आप हमेशा सौ प्रतिशत लॉजिकल रहेंगे, तो आपकी जिंदगी बहुत ही बोरिंग हो जाएगी।ऐसे में खुद में भावनाओं और तर्कों का सही घालमेल रखते हुए खुद को संतुलित रखें।
अपने उद्देश्यों को पूरा करें:
आपका जीवन में क्या उद्देश्य है? इन्हें पूरा करने के लिए आप क्या कदम उठा रहे हैं? खुद से ये सवाल जरूर करें।आप बड़ी सफलताओं के अलावा अपना ध्यान रोजाना के छोटे उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भी निर्धारित करें।
व्याखा रखें, बहाने नहीं:
किसी भी काम को पूरा न करने के पीछे क्या कारण रहे, इसकी व्याखा रखें बजाय कि बहानों के।अपनी गलतियों को मानना सीखें, जिससे कि आप भविष्य में उन्हें दोहराएं न।