Friday , September 25 2020

श्राद्ध को लेकर वास्तु में कुछ बताएं हैं उपाय , आइए जानें

पितरों के लिए श्रद्धा से किया गया मुक्ति कर्म ही श्राद्ध है। पितरों को तृप्त करने की क्रिया तर्पण कहलाती है। श्राद्धकर्म से पितृगण के साथ देवता भी तृप्त होते हैं। श्राद्ध एवं तर्पण से पितृ ऋण भी चुकता होता है। श्राद्ध को लेकर वास्तु में कुछ उपाय बताए गए हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।पितरों की आत्मा शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करना जरूरी माना जाता है। श्राद्ध के 16 दिनों में अष्टमुखी रुद्राक्ष धारण करें। इन दिनों में घर में 16 या 21 मोर पंख अवश्य लाएं। श्रीमद्भागवत गीता का पाठ कराएं। जिस व्यक्ति का श्राद्ध कर रहे हैं उसकी पसंद का भोजन बनाएं। मान्यता है कि श्राद्ध के दिन स्मरण करने से पितर घर आते हैं और अपनी पसंद का भोजन कर तृप्त हो जाते हैं। श्राद्ध के दिनों में घर में प्रतिदिन खीर बनाएं। भोजन में से सर्वप्रथम गाय, कुत्ते और कौए के लिए ग्रास अलग से निकालें। यह सभी जीव यम के निकट माने जाते हैं। श्राद्ध पक्ष में व्यसनों से दूर रहें। श्राद्ध के भोजन में बेसन का प्रयोग न करें। श्राद्ध में किसी जरूरतमंद की सहायता कर सकें तो बहुत पुण्य प्राप्त होता है। श्राद्ध का समय दोपहर में उपयुक्त माना गया है। रात्रि में श्राद्ध नहीं किया जाता। संभव हो तो गंगा किनारे श्राद्ध कर्म करना चाहिए। श्राद्ध के दिनों में पेड़-पौधे लगाने से शुभ फलों में वृद्धि होती है। एकादशी का श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ दान माना जाता है।
नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।