Wednesday , September 23 2020

प्रकाश झा निर्देशित और बॉबी देओल की मुख्य भूमिका वाली वेब सिरीज ‘आश्रम’ की समीक्षा

पंजाब और हरियाणा ‘डेरों’ की स्वीकार्यता बहुत है और इन प्रदेशों की राजनीति में भी इनका खासा प्रभाव है। इसलिए अक्सर यह देखने में आया है कि राजनीतिक दलों के नेता इन डेरों के प्रमुखों का समर्थन हासिल करने के लिए उनसे मिलते रहते हैं। दरअसल, डेरों की समाज में पकड़ का एक बड़ा कारण यह है कि इन्होंने समाज के वंचित, दलित, पिछड़े तबके को काफी स्पेस दिया और उनके जीवन को बेहतर बनाने में सहयोग किया। इनमें कुछ डेरों के प्रमुख काफी विवादास्पद भी रहे और उन्होंने अपने प्रभाव का नाजायज इस्तेमाल किया। उनमें से कुछ को जेल भी जाना पड़ा। इसके बाद भी उनके समर्थक उनके लिए खड़े रहे।प्रकाश झा निर्देशित और बॉबी देओल की मुख्य भूमिका वाली वेब सिरीज ‘आश्रम’ एक ऐसे ही ‘बाबा’ की कहानी है, जो धर्म और सेवा की आड़ में लोगों का शोषण करता है। और इस सफाई से करता है कि शोषित होने वाले ज्यादातर लोग खुद को धन्य मानते हैं। हालांकि ओटीटी प्लैटफॉर्म एमएक्स प्लेयर पर प्रसारित हो रही इस सिरीज के बारे में निर्देशक प्रकाश झा ने ऐसा कुछ नहीं कहा है कि यह किस बाबा पर आधारित है। लेकिन सिरीज में जिस तरह चीजों को दिखाया गया है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह बाबा राम रहीम से प्रेरित है।एक नीची जाति की लड़की परमजीत उर्फ पम्मी (अदिति पोहनकर) पहलवान बन कर देश के लिए मेडल जीतना चाहती है, लेकिन बड़ी जाति के लोग षडयंत्र कर उसे एक मुकाबले में पराजित करवा देते हैं। पम्मी का नोनी भाई घोड़ी पर चढ़ कर बारात में जाना चाहता है, पर घर-परिवार के बड़े-बूढ़े उसे ऐसा करने से रोकते हैं, क्योंकि बारात का रास्ता ‘बड़े मोहल्ले’ से होकर गुजरता है। लेकिन अपने पत्रकार दोस्त अक्की (राजीव सिद्धार्थ) और पम्मी के कहने पर वह बारात घोड़ी चढ़ कर जाता है। इस बात से बड़े मोहल्ले वाले बहुत खफा हो जाते हैं और उनकी खूब पिटाई कर देते हैं। इसमें पम्मी का भाई सत्ती (तुषार पांडेय) बुरी तरह घायल हो जाता है। पम्मी थाने जाकर हत्या की कोशिश की एफआईआर लिखवाती है। सब-इंस्पेक्टर उजागर सिंह (दर्शन कुमार) उसे ऐसा करने से मना करता है, लेकिन पम्मी नहीं मानती। इससे नाराज बड़े मोहल्ले के लोग डॉक्टरों को सत्ती का इलाज नहीं करने देते।तभी परिदृश्य में काशीपुर वाले बाबा निराला (बॉबी देओल) का प्रवेश होता है। बाबा बड़े मोहल्ले के लोगों को हड़काता है, तब जाकर सत्ती का इलाज संभव हो पाता है। पम्मी बाबा की भक्त बन जाती है। उधर जंगल में एक प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के दौरान कंकाल मिलता है, जिसे लेकर सनसनी मच जाती है और प्रदेश की राजनीति में इसे लेकर दांव-पेंच शुरू हो जाते हैं। सत्ताधारी दल इस केस को दबाने की कोशिश करता है और पूर्व मुख्यमंत्री हुकुम सिंह (सचिन श्रॉफ) इसे मुद्दा बनाने की कोशिश करता है। कंकाल की फारेंसिक जांच डॉ. नताशा (अनुप्रिया) करती है। सब-इंस्पेक्टर उजागर उस पर रिपोर्ट बदलने का दबाव डालता है, लेकिन वह ऐसा नहीं करती। उल्टे सही जांच न करने के लिए उजागर को शर्मिंदा भी करती है। नताशा से प्रभावित होकर उजागर इस केस की इमानदारी से जांच करने का फैसला करता है। इसमें उसका साथ देता है कांस्टेबल साधु (विक्रम कोचर), और फिर एक के बाद एक कई घटनाएं होती हैं, जिससे शक की सूई एक ही दिशा की ओर घूमने लगती है… लेखक हबीब फैसल और निर्देशक प्रकाश झा ने इस सिरीज में न सिर्फ धर्म के नाम पर धोखाधड़ी के विषय को उठाया है, बल्कि पाखंडी धर्मगुरुओं, अपराध और राजनीति के गठजोड़ को भी प्रमुखता से दिखाया है। साथ ही, दलित उत्पीड़न के मुद्दे को भी इसमें शामिल किया है। प्रकाश झा की खासियत है कि वह समाज और राजनीति से जुड़े मुद्दों को मनोरंजन की चाशनी में लपेट कर पेश करते हैं। वह उसे इस तरह बनाने की कोशिश करते हैं कि बात लोगों तक पहुंच भी जाए और व्यावसायिक पहलू भी प्रभावित न हो। इस सिरीज में उन्होंने यही सूत्र अपनाया है। कहानी शुरू के एपिसोड में काफी गति से चलती है, लेकिन बाद के एपिसोड में थोड़ी सुस्त हो जाती है। इसकी वजह है कि वह धर्म के नाम पर शोषण, राजनीति, जातिगत मुद्दों, निजी संबंधों आदि कई स्तरों पर एक साथ चलती है। लेकिन इसके बावजूद बोर नहीं करती। आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है। इसे पूरे फिल्मी अंदाज में बनाया गया है। हालांकि यह साफ लगता है कि पहला सीजन बस दूसरे सीजन की पृष्ठभूमि के रूप में बनाया गया है, इसलिए स्वाभाविक रूप से अधूरा-सा लगता है।बाबा निराला की भूमिका में बॉबी देओल प्रभावित करते हैं। उनका गेटअप बहुत बढ़िया है। उनके दोस्त और निकटतम सहयोगी बाबा भोपा की भूमिका में चंदन राय सान्याल का काम बढ़िया है। पम्मी के किरदार को अदिति ने अच्छे से निभाया है। दर्शन कुमार भी अपने किरदार में जंचे हैं और अनुप्रिया गोयनका भी अच्छी लगी हैं। अध्ययन सुमन इस पार्ट में रॉकस्टार टिंका सिंह की बेहद छोटी-सी भूमिका में हैं। हो सकता है, अगले सीजन में उनका रोल बड़ा हो। सत्ती के किरदार में तुषार पांडेय छाप छोड़ते हैं और उनकी पत्नी की भूमिका में त्रिधा चौधरी भी अच्छी लगी हैं। उजागर सिंह के सहयोगी साधु के रूप में विक्रम कोचर दिल जीत लेते हैं। राजीव सिद्धार्थ ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है। बाकी कलाकार भी अपनी भूमिकाओं में ठीक हैं। इस सिरीज को भव्यता के साथ बनाया गया है और देखने में यह ठीक भी लगती है, लेकिन इसका असली आनंद संभवत: दूसरे सीजन में ही आएगा।