Friday , July 3 2020

गुजरात में महसूस किए गए भूकम्प के झटके, भूकंप की तीव्रता 5.5 आंकी गई

देश में कई तरह की आपदाएं मानों इन दिनों एक साथ आ गई हो । एक तरफ लोग कोरोना महामारी से लड़ रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ आए दिन भूकंप ने लोगों को परेशान कर रखा है । अब गुजरात में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं । जिसके बाद लोगों में दहशत का माहौल बन गया है ।
बताया जा रहा है कि राजकोट से 122 किमी उत्तर-पश्चिम में भूकंप का केंद्र था और भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5 आंकी गई है । रात 8.13 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए । फिलहाल किसी के जान के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है ।

इससे पहले 2 जून को कश्मीर में सुबह 8.15 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए थे । रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 3.9 मापी गई थी । भूकंप का केंद्र श्रीनगर शहर से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था ।

अगर आप किसी इमारत के अंदर हैं तो फर्श पर बैठ जाएं और किसी मजबूत फर्नीचर के नीचे चले जाएं । यदि कोई मेज या ऐसा फर्नीचर न हो तो अपने चेहरे और सर को हाथों से ढंक लें और कमरे के किसी कोने में दुबककर बैठ जाएं ।
अगर आप इमारत से बाहर हैं तो इमारत, पेड़, खंभे और तारों से दूर हट जाएं ।
अगर आप किसी वाहन में सफर कर रहे हैं तो जितनी जल्दी हो सके वाहन रोक दें और वाहन के अंदर ही बैठे रहें ।
अगर आप मलबे के ढेर में दब गए हैं तो माचिस कभी न जलाएं, न तो हिलें और न ही किसी चीज को धक्का दें ।
मलबे में दबे होने की स्थिति में किसी पाइप या दीवार पर हल्के-हल्के थपथपाएं, जिससे कि बचावकर्मी आपकी स्थिति समझ सकें. अगर आपके पास कोई सीटी हो तो उसे बजाएं ।
कोई चारा न होने की स्थिति में ही शोर मचाएं । शोर मचाने से आपकी सांसों में दमघोंटू धूल और गर्द जा सकती है ।
अपने घर में हमेशा आपदा राहत किट तैयार रखें ।
भूकंप आता कैसे है?
पृथ्वी की बाहरी सतह सात प्रमुख और कई छोटी पट्टियों में बंटी होती है । 50 से 100 किलोमीटर तक की मोटाई की ये परतें लगातार घूमती रहती हैं । इसके नीचे तरल पदार्थ लावा होता है और ये परतें (प्लेटें) इसी लावे पर तैरती रहती हैं और इनके टकराने से ऊर्जा निकलती है, जिसे भूकंप कहते हैं ।
भारतीय उपमहाद्वीप को भूकंप के खतरे के लिहाज से सीसमिक जोन 2,3,4,5 जोन में बांटा गया है । पांचवा जोन सबसे ज्यादा खतरे वाला माना जाता है ।पश्चिमी और केंद्रीय हिमालय क्षेत्र से जुड़े कश्मीर, पूर्वोत्तर और कच्छ का रण इस क्षेत्र में आते हैं।