Friday , September 25 2020

भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का कहा जाता हैं वास्तुकार, हर युग में रची अद्भुत रचना

अश्विन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा की उपासना की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ। भगवान विश्वकर्मा दुनिया के पहले वास्तुकार माने जाते हैं। वह भगवान ब्रह्मा के वंशज हैं और तकनीक पक्ष के देवता हैं। वास्तुशास्त्र को देव विद्या माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा ने मानव जाति को यह विद्या प्रदान की ताकि मनुष्यों का जीवन सुखमय हो। तकनीकी कार्यों में भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद आवश्यक माना जाता है।
भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का वास्तुकार कहा जाता है। सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा वास्तुदेव एवं अंगिरसी के पुत्र हैं। उन्होंने सतयुग में स्वर्गलोक का निर्माण किया तो त्रेता युग में लंका का, द्वापर में द्वारका और कलियुग के आरंभ से पूर्व हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ का निर्माण किया। माना जाता है कि द्वारका नगरी को भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में ही बना दिया था। पुरी में जगन्नाथ मंदिर में स्थित विशाल मूर्तियों का निर्माण भी उन्होंने किया। प्राचीन काल में जितनी भी राजधानियां थीं, सभी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाईं। भगवान विश्वकर्मा ने ही देवी-देवताओं के सारे शस्त्र बनाए। मां दुर्गा के शस्त्रों का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया। पुष्पक विमान भी उनके द्वारा बनाया गया। भगवान इंद्रदेव के वज्र के साथ भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र का निर्माण भी उन्होंने किया।
नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।