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मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सिद्धी की होती हैं प्राप्ति, मां से जुड़ी पढें पौराणिक कथा

17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ हो चुके हैं। आज नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। हर देवी की अपनी कहानी विशेष है। यह कहानियां मनुष्य को जीवन की कठिनाइयों से निरंतर लड़ते रहने की प्रेरणी देती हैं। भक्त माता की पूजा करते हैं और नौ दिनों के कठिन व्रत रखते हैं। यह सकारात्मकता और समर्पण का त्योहार है।
मां ब्रह्मचारिणी से जुड़ी पौराणिक कथा:
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानि तप का आचरण करने वाली बताया गया है। मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमंडल है। नारद जी के आदेशानुसार भगवान शिवशंकर को पति के रूप में पाने के लिए देवी ने वर्षों तक कठिन तपस्या की। एक हजार वर्षों तक माता ने सिर्फ फल-फूल खाकर जावन यापन किया। कठोर तप के दौरान देवी ने धूप, गर्मी, ठंड, बारिश सब कुछ सहा। अंत में उनकी तपस्या सफल हुई। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सिद्धी की प्राप्ति होती है। तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि के लिए देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है।
इनका पूजन मंत्र है:
दधाना करपाद्माभ्याम, अक्षमालाकमण्डलु।
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
मां दुर्गा पूजा के दूसरे दिन पीले रंग के वस्त्र धारण कर माता की उपासना करें। मां ब्रह्मचारिणी की जीवन कथा से भक्त सच्ची प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं कि कठोप परिश्रम और तप से जीवन में कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है। मजबूत इच्छाशक्ति, त्याग, परिश्रम और दृढ़ निश्चय से किए जाने वाले कार्य सदैव सफलता की ओर ले जाते हैं। इस नवरात्रि मां की पूजा के साथ ही उनके जीवन से प्रेरणा भी ग्रहण करिए।