Tuesday , November 24 2020

पवित्र शारदीय नवरात्र में चौथे दिन मां कूष्माण्डा की जाती हैं उपासना

पवित्र शारदीय नवरात्र में चौथे दिन मां कूष्माण्डा की उपासना की जाती है। मंद मुस्कान एवं तेजस्वी चेहरे वाली मां की पवित्र मन से उपासना करनी चाहिए। मां कूष्माण्डा ने ब्रह्मांड की रचना की। मां आदि स्वरूपा, आदि शक्ति हैं। मां का निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। मां कूष्माण्डा को ही सूर्यलोक में रहने की शक्ति प्राप्त है। मां कूष्मांडा की उपासना से तेज की प्राप्ति होती है।
ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में तेज मां की ही छाया है। माता की कृपा से ज्ञान की प्राप्ति होती है। मां योग-ध्यान की देवी हैं। मां का स्वरूप अन्नपूर्णा का भी है। मां की उपासना से आयु, यश और आरोग्य की वृद्धि होती है। नौकरी, व्यापार में उन्नति प्राप्त होती है। माता कूष्माण्डा की पूजा से वाणी दोष दूर हो जाते हैं और वाणी के बल पर कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
मां कूष्मांडा को सौंफ और मिश्री का भोग लगाएं। ऐसा करने से वाणी दोष दूर हो जाते हैं। मां की उपासना करते समय हरे वस्त्र धारण करें। हरे आसन पर बैठें। मां को लाल वस्त्र, लाल फूल और लाल चूड़ियां अर्पित करें।
नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।