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इस व्रत के प्रभाव से जीवन की सभी अभिलाषाएं हो जाती हैं पूर्ण,जानें

मनुष्य के जीवन की सभी आशाओं को पूर्ण करने वाला आशा दशमी व्रत महाभारत काल से मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन की सभी अभिलाषाएं पूर्ण होती हैं। माता पार्वती को समर्पित आशा दशमी व्रत किसी भी मास में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि से आरंभ किया जा सकता है। इस व्रत के प्रभाव से रानी दमयंती ने राजा नल को प्राप्त किया था।
इस व्रत को आरोग्य व्रत भी कहा जाता है। इस व्रत को धारण करने से मन शुद्ध रहता है और शरीर निरोगी रहता है। इस व्रत में अपने घर के आंगन में दसों दिशाओं की पूजा आराधना करनी चाहिए। दस दिशाओं को देवियों के रूप में मानकर इनका पूजन करना चाहिए। इस दिन माता पार्वती का पूजन करें। भगवान श्री हरि विष्णु का स्मरण करते हुए पुष्प, गंध, धूप, फल आदि से पूजन करें। लाल पुष्प तथा गुड़ निर्मित नैवेद्य भगवान को अर्पित करें। 10 आशा देवियों की पूजा करनी चाहिए। इस व्रत में ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देने के बाद प्रसाद स्वयं ग्रहण करना चहिए। जब तक अभिलाषा पूर्ण न हो तब तक हर माह इस व्रत को करना चाहिए। मान्यता है कि जो कन्या इस व्रत को करती है तो उसे श्रेष्ठ वर की प्राप्ति होती है। मनोकामना पूर्ण होने पर इस व्रत का उद्यापन करना चाहिए।
नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।