Wednesday , January 19 2022

मकरा ही नहीं सोनभद्र में कई गांव के लोग चुहाड़ के पानी पर आश्रित, कभी भी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं ग्रामीण

संजय केसरी/अर्जुन मौर्य (संवाददाता)

डाला । मिर्जापुर जनपद सूबे का सबसे बड़ा जनपद हुआ करता था । बड़ा जनपद होने की वजह से यहां विकास कार्य प्रभावित हुआ करती थी । विकास को ध्यान में रखकर नया जनपद सोनभद्र का सृजन किया गया । लेकिन अफसोस कि तीन दशक से ज्यादे का समय बीत गया लेकिन आज भी लोगों को शुद्ध पानी तक नसीब नहीं हुआ । आज भी लोग नदी, नाले व चुहाड़ का पानी पीने को मजबूर हैं । म्योरपुर ब्लाक के मकरा ग्राम पंचायत में दूषित पानी पीने से अब तक लगभग 40 से अधिक लोगों की मौत हो गयी ।
इतनी बड़ी संख्या मौत होने से प्रशासनिक अमले में हड़कम्प मच गया । मौत का जिम्मेदार कौन है यह अब तक जांच में सामने नहीं आ सका है ।
यूपी चुनाव नजदीक होने की वजह से शासन-प्रशासन भी फूंक फूंक कर कदम रख रही है । योगी सरकार के समाज कल्याण राज्यमंत्री भी प्रभावित इलाका मकरा में लोगों को ज्ञान ही बांट आये ।

सोनभद्र में दूषित पानी के ऊपर आश्रित रहने वालों की कमी नहीं है । कई इलाके ऐसे हैं जहां आज भी लोग चुहाड़ का पानी पीने को मजबूर हैं, उंसके पास इसके सिवाय कोई विकल्प ही नहीं है ।
चोपन विकास खण्ड के कोटा ग्राम पंचायत का तिलवाड़ी गड़ई इलाका दशकों से बुनियादी सुविधाओं का दंश झेल रहा है । यहां के लोगों के वोटर कार्ड धारक तो हैं लेकिन सुविधाओं के अभाव में वर्षों से झेल रहे हैं । दूषित पानी को लेकर कई दर्जन लोग मकरा में जान गवां चुके हैं जबकि यहां के लोग वर्षों से इसी चुहाड़ का पानी पी रहे हैं । यहां के लोगों का कहना है कि वे दूषित पानी पीकर बीमार होते है लेकिन उनके पास विकल्प क्या है ।

मजे की बात यह है कि यह इलाका राज्यमंत्री संजीव गोंड़ के कैम्प कार्यालय के नजदीक का स्थान है ।
ऐसे में प्रशासन को मकरा ग्राम पंचायत की घटना से सबक लेते हुए इस तरह की गांवों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि समय रहते उपाय हो जाय वरना बाद में मामला हाथ से निकलने के बाद कहीं स्थिति मकरा जैसी न हो जाय ।
इस दौरान पिंटू,नंदलाल, मुन्ना, बिरेंद्र प्रसाद, कृष्णावती देवी, अंता,अनीता, सुमन,अनीता, सुनीता परमेश्वरी, चंदा, बछिया, कविता, फूलवती, दिना, धनमतीया, आदि मौजूद रहे।