Saturday , December 4 2021

हिमालय की चोटियां, बाबा केदार का सानिध्य एक अलग अनुभूति दे रहा- प्रधानमंत्री

० देश के पीएम नरेन्द्र मोदी पहुंचे बाबा के धाम
केदारनाथ से करोड़ों देश वासियों को किया संबोधित
० देश वासियों को प्रेम-संदेश और श्रद्धा का पाठ पढ़ा गये पीएम
रुद्रप्रयाग । देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज सुबह आठ बजे के करीब केदारनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने साढे आठ से नौ बजे तक बाबा केदार की पूजा-अर्चना की और फिर बाहर आकर नंदी भगवान को हाथ जोड़कर मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद वे भीमशिला की ओर गए और हाथ जोड़कर नमन किया। यहां से वे आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि स्थल पर गये और यहां उन्हांेने थोड़ी देर समय व्यतीत कर साधना की।
पीएम मोदी आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि स्थल का अनावरण करने के बाद मंदिर परिसर में पहुंचे। जहां से उन्होंने देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने केदारनाथ की धरती से देश वासियों को हाथ जोड़कर नमन किया और कहा कि इस स्थान पर आकर एक अलग ही अनुभूमि का अहसास हो रहा है। यहां की हवाएं, हिमालय की चोटियां, बाबा केदार का सानिध्य नजाने कैसे अनुभूमि की तरफ खिंचा चला जाता है। इसके लिए कोई शब्द ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दीपावली के पावन अवसर पर वे सीमा पर अपने सैनिकों के साथ थे। देश वासियों के प्रेम का संदेश और श्रद्धा लेकर सैनिकों के बीच गये और आज गोवर्द्धन पूजा के दिन केदारनाथ धाम पहुंचे हैं। आज से गुजरात के लोगों के लिए नया वर्ष शुरू होता है।
80 के दशक में गरूड़चट्टी में की गई साधना को किया याद
80 के दशक में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ धाम से ढाई किमी पहले गरूड़चट्टी स्थान पर साधना की थी। वे हर रोज यहां से केदारनाधाम के लिए निकलते थे और बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाकर आते थे और साधना में लीन रहते थे। आज केदारनाथ पहुंचकर उन्होंने अपने पुरानें दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि 80 के दशक में भी वे केदारनाथ धाम पहुंचे थे और उन्होंने बाबा की साधना की थी। उनके मित्र आज भी उन्हें जानते हैं और उनमें कुछ लोग आज भी इस स्थान में मौजूद हैं, जबकि कुछ पुराने लोग इस स्थान को छोड़कर चले गये हैं तो कुछ धरा को छोड़कर चले गये हैं। वे उन सभी लोगों को जो आज उनके बीच नहीं हैं, उन्हें नमन करते हैं।
आपदा के समय भी केदारनाथ धाम पहुंचे थे पीएम मोदी
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आपदा के समय भी वे यहां पहुंचे थे। उस दौरान वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और वे यहां आकर सबकुछ देख चुके थे। उस समय लोगों को लगा था कि क्या पुनः से बाबा केदार बस पायेगा या फिर खड़ा हो पायेगा। मैं खुद को यहां आने से रोक नहीं पाया था। उस दर्द को देख रहा था। जो लोग यहां आते थे वो सोचते थे अब क्या केदारपुरी दोबारा से उठ खड़ा होगा, लेकिन मेरे भीतर की आवाज कह रही थी, यह केदार आन, बान और शान के साथ खड़ा हेागा। यह विश्वास बाबा केदार के प्रति आस्था, शंकराचार्य की साधना और ऋषि-मुनियों की तपस्या से मिल रहा था। मेरे पास गुजरात के कच्छ में भूकंप के बाद कच्छ को खड़ा करने का अनुभव था। आज अपनी आंखों से सपने को साकार होता देखना, यह जीवन का संतोष है। सौभाग्य मानता हूं कि केदार बाबा की इन हवाओं ने मुझे कभी पाला था, उसकी सेवा करने का सौभाग्य मिला। इससे बड़ा जीवन का पुण्य और कुछ नहीं हो सकता है।
केदारनाथ में हुए विकास कार्यो की सराहना की
पीएम नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ में हुए विकास कार्यो की सराहना की। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर की सहज कृपा का परिणाम है कि आज केदारपुरी भव्य और सुंदर नजर आ रही है। उत्तराखण्ड सरकार के ऊर्जावान, नौजवान मुख्यमंत्री धामी ने इन कामों की जिम्मेदारियांे को उठाया। मैं आज उनका हदय से धन्यवाद करता हूं। साथ ही उन श्रमिकों का आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने ऐड़ी चोटी का जोर लगाकर इस सपनों को पूरा किया है। केदारनाथ में पूरे सालभर तक काम करना मुश्किल होता है। यहां मौसम खराब रहने से कम समय मिलता है। बर्फवारी के बीच भी श्रमिकों ने काम किया। ये श्रमिक पहाड़ों के नहीं थे, बाहर से आये इन श्रमिकों ने ईश्वरीय कार्य मानकर बर्फ और वर्षा के बीच माइनस तापमान में भी कार्य किया। मैं दिल्ली से अपने कार्यालय से सब कुछ देखता था और खुशी जताता था कि देश-विदेश के करोड़ों हिन्दुओं के आस्था का प्रतीक पुनः से संवर रहा है। यहां आधुनिक अस्पताल, रैन शैल्टर शेड, पर्यटक सुविधा केन्द्र, केदारनाथ तीर्थ स्थल में संग्रहालय (म्यूजियम) परिसर सहित सरस्वती सिविक एमेनिटी भवन का निर्माण कार्य होने जा रहा है। ये सभी चीजे तैयार होने के बाद श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलेंगी। कहा कि मंदाकिनी नदी के किनारे बाढ़ से सुरक्षा के लिए दीवार का निर्माण कार्य हो चुका है। इससे श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित होगी। तीर्थ पुराहितों के आवासों का कार्य हो चुका है। इससे हर मौसम में सुविधा मिलेगी। भगवान केदारनाथ की सेवा सरल और आसान होगी। इसके अलावा आदि गुरू शंकराचार्य समाधि एवं प्रतिमा का कार्य, सरस्वती नदी के तट पर बाढ़ सुरक्षा तथा घाटों का निर्माण और गरूड़चट्टी के लिए मंदाकिनी नदी पर पुल का कार्य हो चुका है। इन सभी कार्यो के बाद से केदारपुरी का नजारा भव्य नजर आ रहा है। वे पहले भी देख चुके हैं कि प्राकृतिक आपदा के समय लोग यहां फंस जाते थे। उस समय मैं देखता था कि तीर्थ पुरोहित बाहर सोते थे और यजमानों की सेवा में जुटे रहते थे। उनके तीर्थ पुरोहितों के साथ ही श्रद्धालुओं को कष्ट से मुक्त, केदार से युक्त, जय भेले के चरणों में लीन होने का सुखद अनुभव मिलेगा।
अदभुत बोध के ज्ञाता थे शंकराचार्य

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आदि गुरू शंकराचार्य को छोटी सी उम्र में ही अदभुत बोध होने के साथ ही शास्त्रों का ज्ञान था। जिस उम्र में एक साधारण व्यक्ति साधारण रूप से संसार की बातों को सुनता और समझना शुरू करता है, उस उम्र में आदि गुरू शंकराचार्य वेद्धांत की गहराईयों को समझ चुके थे। उनकी व्याख्या अविरल रूप से करते थे। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य साक्षात शिव शंकर का अवतार थे। कहा कि शंकर के भीतर शंकर साक्षता शंकरत्व का जागरण के सिवाय कुछ नहीं हो सकता। आज यहां संस्कृत और वेदों के बड़े-बेड़े पंडित बैठे हैं। साथ ही वर्चुअली भी जुड़े हैं। मैं इतना ज्ञानी नहीं हुआ, मगर इतना जानता हूं कि शंकर का अर्थ कल्याण करने वाला होता है। शंकराचार्य का जीवन असाधारण था। विश्व के कल्याण के लिए वे समर्पित थे। एक समय में भारत रागद्वेष के भंवर में फंसकर एक जुटता को खो रहा था। तब आदि गुरू शंकराचार्य ने कहा कि लोभ, ईश्या और अहम ये सब हमारा स्वभाव नहीं है। उन्होंने समाज में चेतना फंूकने का काम किया। शंकराचार्य ने भारत की चेतना में फिर से प्राण फूंके। उन्नति का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान विहिन यानि दुख, कष्ट और कठिनाईयों से मुक्ति का एक ही मार्ग, ज्ञान है। भारत के ज्ञान और विज्ञान के दर्शन की कामातित परम्परा है। उसे आदि शंकराचार्य ने फिर से पुनर्जीवित किया। आदि गुरू शंकराचार्य ने समाज को इस सत्य से परिचित कराने का काम किया। हमारे पवित्र मठों की स्थापना की। चारधामों की स्थापना की। द्वादश ज्योतिर्लिंगों को जागृत किया। धर्म की विरासत को ये मठ-मंदिर हजारों सालों से जीवित रखे हुए हैं। कहा कि चारधाम का महत्व सदियों से रहा है। हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार चारधाम जरूर जाना चाहिए। मां गंा में डुबकी जरूर लगानी चाहिए। अपने बच्चों को शुरू से ही वेदों की जानकारी दें। कहा कि उन्हें एक भारत श्रेष्ठ भारत के दर्शन कराएं। पीएम मोदी ने कहा कि बाबा केदार के दर्शन करके हर श्रद्धालु एक नयी ऊर्जा को साथ लेकर जाता है।
धार्मिक संस्कृति की विरासत को संजोनो की जरूरत

पीएम मोदी ने कहा कि आदि गुरू शंकराचार्य की विरासत हमारे लिए एक प्रेरणा के रूप में है। अब हमारी संस्कृति की विरासत और आस्था के केन्द्रों को गौरव भाव से देखा जा रहा है। जिस प्रकार से देखा जाना चाहिए था। आज अयोध्या में श्रीराम चन्द्र का भव्य मंदिर बन रहा है। अयोध्या को उसका गौरव सदियों के बाद मिल रहा है। हम अयोध्या में दीपोत्सव के प्राचीन स्वरूप की कल्पना कर पा रहे हैं। यूपी में काशी का कायाकल्प हो रहा है। साथ ही भगवान रामचन्द्र के मंदिरों का पुनरक्षण किया जा रहा है। उन्हें आधुनिकता की ओर मोड़ा जा रहा है। इतना सब कुछ होने से हमारा भारत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। देश नये संकल्प ले रहा है। समय की सीमा भी निर्धारित की गई है। इतने कम समय में ये सब कैसे होगा, होगा या नहीं। तब मेरे भीतर से एक ही आवाज आती है। मुझे 130 करोड़ लोगांे की आवाज सुनाई देती है कि समय के दायरे में बंधकर भयभीत होना अब भारत को मंजूर नहीं है। आदि गुरू शंकराचार्य छोटी सी आयु में केरल से केदारनाथ पहुंच गए। उनका बहुत ही कम आयु में पवित्र भूमि में शरीर विलिन हो गया। भारत के लिए नया भविष्य तैयार किया। उर्जा प्रज्जवलित की। जो आने वाले हजारों सालो तक गतिमान रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत देश की इस धरती पर महान विभूतियांे ने जन्म लिया। जिन्होंने समय की सीमाओं का उल्लंगन कर छोटे से काल में कई-कई युगो को गढ़ दिया। भारत महान विभूतियों की प्रेरणा पर चल रहा है। देशवासियों से एक ओर आग्रह करना चाहता हूं कि स्वाधीनता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों को देखने के साथ ही ऐसे पवित्र स्थानों पर जांए। नई पीढ़ी को परिचित कराएं। मां भारती का साक्षात करें। पवित्र स्थानों के दर्शन करने को जाना चाहिए।
सड़क मार्ग से जुडे़गा केदारनाथ धाम, हेमकुंड में होगा रोप-वे का निर्माण
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ पहुंचकर देशवासियों को सौगात दी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में चारधामों को आॅल वेदर से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही भविष्य में केदारनाथ धाम को भी सड़क मार्ग से जोड़ा जायेगा। इससे जुड़ी प्रक्रिया शुरू हो गई हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं को हेमकुंड साहिब के दर्शन करने में भी आसानी हो सकेगी। यहां पर रोप-वे के लिए तैयारियां चल रही हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का कार्य तेजी से चल रहा है। आज के समय में पहाड़ के लोगों को रेल देखना मुश्किल हो रहा है। अब उन्हें आसानी से रेल के दर्शन भी हो जायेंगे। उत्तराखण्ड के पर्यटन में तेज गति से कार्य हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि जितने लोग पिछले सौ सालों में यहां आये हैं, आने वाले दस सालों में उससे भी ज्यादा लोग आयेंगे। उत्तराखण्ड की अर्थ व्यवस्था को बल मिलेगा। कोरोना काल से पहले यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण संख्या घट गई।
होम स्टे से माताओं और बहिनों को मिला रोजगार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने होम स्टे योजना की शुरूआत कर माताओं और बहिनों को घर पर ही रोजगार देने का काम किया है। पर्यटकों को होम स्टे काफी पसंद आ रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को घर पर ही रोजगार मिला है और उन्हें स्वाभिमान से जीने का अवसर मिल रहा है। उत्तराखण्ड की सरकार जिस तरह से विकास के कार्यो में जुटी हुई है, वह सराहनीय है। पहाड़ का पानी और जवानी दोनों ही पहाड़ के काम आ रही है। पलायन रूक रहा है।
उत्तराखण्ड की धरती ने दिया वीरों को जन्म
रुद्रप्रयाग। पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखण्ड की धरती अनेकों वीर जवानों की जन्मस्थली रही है। यहां का कोई गांव ऐसा नहीं है, जहां पराक्रम की कोई गाथा न हो। उन्होंने कहा कि सरकार सेनाओं का आधुनिकरण कर रहा है। आत्मनिर्भर बना रहा है। वीर सैनिकों की ताकत बढ़ रही है। उनकी अपेक्षाओं को बहुत प्राथमिकता देकर कार्य किया जा हा है। ये हमारी सरकार ने किया है कि पिछली शताब्दी की मांग वन रैंक वन पेंशन इस शताब्दी में पूरी हुई है। देश के सेना के जवानों की सेवा करने का मौका मिला है।
कोरोना की लड़ाई में अनुशासन का दिया परिचय
रुद्रप्रयाग। देश के पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि उत्तराखण्ड ने कोरानो के खिलाफ लड़ाई में अनुशासन का परिचय दिया है। प्रदेश के लोगों ने सिंगल डोज का लक्ष्य हासिल किया है। पहाड़ में कष्ट कितना अधिक है, यह पहाड़ की जनता जानती है। बावजूद इसके सरकार ने लक्ष्य को पूरा किया। दृढ़ इच्छा शक्ति और संकल्प के साथ कार्य को पूरा किया गया। उन्होंने प्रदेश के एक-एक व्यक्ति और सरकार की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जितनी ऊंचाईयों पर उत्तराखण्ड बसा है, उससे भी ज्यादा ऊंचाइयों को उत्तराखण्ड हासिल करेगा। उन्होंने आग्रह किया कि देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का संकल्प लें। उन्होंने देशवासियों को दीपावली के त्यौहार से लेकर छठ पूजा तक की शुभकामनांए दी।
तीर्थ पुरोहितों से नहीं मिले पीएम मोदी
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केदारनाथ धाम पहुंचे। आज सुबह आठ बजे वे केदारनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले बाबा का आशीर्वाद दिया और फिर आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि स्थल का अनावरण करने के साथ ही करोड़ों की योजनाओं का लोकार्पण करने के साथ ही शिलान्यास भी किये। इसके बाद उन्होंने करोड़ों देशवासियों को संबोधित किया। करीब 11 बजे तक उन्होंने संबोधन किया और वे केदारनाथ से देहरादून के लिए निकल पड़े। इस दौरान तीर्थ पुरोहितों ने पीएम मोदी से मुलाकात करने की कोशिश की, मगर वे नहीं मिल पाये। हालांकि इस बात का तीर्थ पुरोहितों ने आक्रोश नहीं जताया। क्योंकि पीएम मोदी अपने संबोधन में तीर्थ पुरोहितों के तारिफों के पुल बांध गए। जिससे उनके न मिलने पर तीर्थ पुरोहितों ने कोई नाराजगी व्यक्त नहीं की।