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जिला पंचायत चुनाव के चाणक्य बने छत्रबली सिंह

विनोद कुमार

*अपने दोनों प्रत्याशियों को निर्दल जिताया*
*जिला पंचायत की कुर्सी पर कब्जा जमाने की मुहिम में जूटे*
शहाबगंज (चन्दौली)। पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद एक बार फिर पंचायत चुनाव के चाणक्य बनकर छत्रबली सिंह उभरे हैँ।जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा ने जिले की कुर्सी पर कब्जा जमाने के पिछड़ी जाति के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सर्वेश कुशवाहा पर दाव लगाया लेकिन उनके चुनाव हारने के साथ खत्म हो गया।वहीं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह ने अपने चाणक्य नीति का परिचय देते हुए भाजपा में शामिल हो गये।टिकट के लिए अपने दो दावेदारों पिछड़ी जाति से पूर्व ब्लाक प्रमुख दीनानाथ शर्मा और आजाद राम पर दाव लगाया।लेकिन टिकट वितरण में भाजपा हाई कमान द्वारा दीनानाथ के ऊपर तरजीह देते हुए सेक्टर 1 से समाजसेवी संजय सिंह को टिकट दे दिया।वहीं सेक्टर 2 से दूसरे प्रत्याशी आजाद राम को टिकट दे दिया।बावजूद छत्रबली सिंह ने शहाबगंज सेक्टर दो से दीनानाथ के पक्ष में प्रचार करना बंद नहीं किया।भाजपा कार्यकर्ताओं ने जब दबाव बनाया तो इन्होंने प्रचार करने से इंकार करते हुए अपने दूसरे प्रत्याशी अजाद राम का टिकट वापस करते हुए दोनों प्रत्याशियों को निर्दल मैदान में उतारा और सारे गणित को फेल करते हुए अपने दोनों प्रत्याशियों को भारी मतों के अंतर से जीत दिला कर अपने नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।वहीं एक बार फिर अपने पुराने साथी पूर्व ब्लाक प्रमुख दीनानाथ शर्मा को जिला पंचायत की कुर्सी पर बैठाने के लिए तानाबाना बुनना शुरू कर दिया।इनके नेतृत्व क्षमता की झलक शहाबगंज ब्लाक प्रमुख बनने के बाद शुरू हुआ जब पूर्व ब्लाक प्रमुख लक्ष्मण सिंह के असामयिक मौत होने के बाद कुर्सी पर कब्जा जमाया।उसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर वापस नहीं देखा।2010 में बसपा सरकार में राजनैतिक पैठ बनाकर सदर के पूर्व ब्लाक प्रमुख कद्दावर नेता विरेन्द्र सिंह के खिलाफ उनके गढ़ में ही जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़कर भारी मतों के अंतर से जीत हासिल किया।बसपा के पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एड के सहयोग से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाया और शहाबगंज ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित होने पर अपने सार्थी (ड्राइवर) दीनानाथ शर्मा को निर्विरोध ब्लाक प्रमुख बना दिया।इसके बाद 2015 में जब सपा सरकार में जब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी सामान्य हो गयी तो इन्होंने सारे समीकरण को ध्वस्त करते हुए अपनी पत्नी सरिता सिंह को समाजवादी पार्टी के सहयोग से जिला पंचायत अध्यक्ष बना दिया।सपा के दिग्गज हाथ मलते रह गए।वहीं सरकार बदलने के बाद भी अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण किया।वहीं जब भाजपा के लिए पिछड़ी जाति से कोई जिला पंचायत सदस्य नहीं जितने के बाद एक बार फिर छत्रबली सिंह ने अपने मोहरे को कुर्सी पर बैठाने के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया है।पंचायत चुनाव के इसी नेतृत्व क्षमता के कारण इन्हें पंचायत चुनाव का चाणक्य कहा जाता है।